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ललित जैन मालवा न्यूज रानापुर
भगवान महावीर ने जो मार्ग बताया है उसे पर चलकर ही जीव का आत्म कल्याण हो सकता है। भगवान ने जीव के उद्धार के लिए सत्य अहिंसा व संयम की राह बताई है। उक्त उद्गार राजेंद्र भवन में धर्म सभा में आचार्य देवेश श्री दिव्यानंदश्रीजी महाराज साहब ने कही।आचार्य श्री का प्रथम बार नगर आगमन हुआ ।जैन श्वेतांबर श्री संघ ने बड़े ही उत्साह के साथ आचार्य श्री एवं मुनि मंडल की भावभीनी अगवानी की। झाबुआ की ओर से विहार कर आचार्य श्री सुबह नगर में पहुंचे। झाबुआ नाके से शोभायात्रा शुरू हुई। शोभायात्रा पुराना अस्पताल, पुलिस थाना ,आजाद मार्ग ,सुभाष मार्ग ,पुराना बस स्टैंड ,एमजी रोड ,सरदार मार्ग, शिवाजी चौक से होकर गुजरी। इस दौरान आचार्य श्री एवं मुनि मंडल ने मुनिसुव्रतनाथ मंदिर एवं सुविधिनाथ मंदिर में दर्शन कर चैत्य वंदन किया। जगह-जगह जैन अजैन लोगों ने गुरुदेव का अक्षत गहुली कर आशीर्वाद लिया ।शोभायात्रा राजेंद्र भवन में पहुंचकर धर्म सभा में परिवर्तित हो गई।

राजेंद्र भवन में हुई धर्मसभा-
धर्म सभा में सर्वप्रथम गुरु वंदन किया गया ।आचार्य श्री के मांगलिक से सभा की शुरुआत हुई। गुरुदेव के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन संजय मेहता ,सोहन सेठ ,दिलीप सकलेचा व चंद्रसेन कटारिया ने किया।मुनिश्री वैराग्यानन्द जी ने कहा कि कथा वह होती है जो भव का थाक उतारे।उन्होंने बताया भगवान सभी पर समदृष्टि रखते है चाहे कोई उन्हें हानि या कष्ट भी पहुंचाए तो भी भगवान उसके प्रति अपने भाव नही बदलते।उन्होंने भगवान महावीर के प्रथम शिष्य गौतमस्वामी ,चंडकौशिक नाग,अर्जुन माली,दृढ़ प्रहारी दृष्टांत के माध्यम से भगवान की समदृष्टि समझाई।
मंगल प्रवेश पर स्वामीवात्सल्य के लाभार्थी सोहनलाल सेठ का बहुमान श्री संघ अध्यक्ष दिलीप सकलेचा, सचिव प्रदीप भंसाली,कोषाध्यक्ष विक्की सकलेचा व मुनिसुव्रतनाथ जिनमंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष चंद्रसेन कटारिया ने किया।झाबुआ श्रीसंघ के वरिष्ठ श्रावक धर्मचंद मेहता का बहुमान रमेशचन्द्र नाहर, मनोहरलाल सकलेचा,अनिल सेठ आदि ने किया।मंगल प्रवेश में बड़ी संख्या में झाबुआ आदि श्रीसंघ के श्रावक श्राविका शामिल हुए।संचालन कमलेश नाहर ने किया।

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