त्रिशला माता के चौदह सपनाजी के साथ पानाजी की शोभायात्रा निकली


ललित जैन मालवा न्यूज रानापुर
पर्युषण पर्व के चौथे दिन मंगलवार को कल्पसूत्र महाग्रन्थ का वाचन साध्वी श्री अर्हम निधिश्री जी ने प्रारंभ किया । लाभार्थी मोतीलाल सालेचा के निवास स्थान से ढ़ोल ढमाकों के साथ ग्रन्थ को चारित्र आराधना भवन लाया गया। यहां ग्रन्थ की अष्टप्रकारी पूजन,वासक्षेप पूजन व आरती पस्चात ग्रन्थ साध्वी जी को वोहराया गया ।
कल्पसूत्र का हर अक्षर मंत्र समान–
साध्वी श्री जी ने यहाँ कल्पसूत्र का वाचन प्रारम्भ किया। उन्होंने बताया कि आचार्य भद्रबाहुसुरी जी द्वारा रचित यह महाग्रन्थ परम प्रभावशाली है।इसका एक एक अक्षर मंत्र जैसा है।इसके श्रवण से व्यक्ति के पूर्व के कर्म बन्ध कट जाते है तथा नए कर्म बंध रुक जाते है। कल्पसूत्र वाचन के पश्चात भगवान के 14 स्वप्नों को सिर पर उठाकर जुलूस के रूप में घुमाने की बोली हुई । दोपहर में भगवान महावीर की माता द्वारा देखे गए 14 स्वप्नों की शोभायात्रा निकली। ढोल के साथ निकली शोभायात्रा में महिलाएं अपने सर पर स्वप्न उठाकर चल रही थी। श्राविकाओं ने चुनडी का व्रत किया।शोभायात्रा में अधिकतर महिलाएं चुनडी पहने हुए थी। शोभायात्रा में युवाओं ने जयकारे लगाते पर प्रभु भक्ति की । जुलुस नगर के मुख्य मार्गो से निकल कर पुनः आराधना भवन पहुचा । यहाँ ज्ञान जी की आरती हुई । जुलूस पश्चात लड्डू की प्रभावना लक्छमीचन्दजी नाहर की और से वितरित की गई ।
रात्रि में भक्ति और जागरण हुई
सोमवार को रात्रि में कल्पसूत्र को रात अपने घर लाने के लाभार्थी मोतीलाल सालेचा के यहाँ पूरा समाज ढोल के साथ उनके घर गया । यहां ज्ञान जी आरती हुई परिवार की ओर से संघ पूजा की गई । चारित्र आराधना भवन में कल्पसूत्र की जागरण ओर भक्ति हुई । पार्श्व संगीत मण्डल द्वारा प्रभु भक्ति के गीत से सभी को झूमने को मजबूर कर दिया ।
