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ललित जैन
पर्यूषण पर्व के दूसरे दिन श्री मुनिसुव्रत जिनालय में अपने प्रवचन में साध्वी अर्हमनिधि जी ने कहा की योग से हमे मानव भव प्राप्त हुआ है तो हमे धर्म क्रियाओं माध्यम से भव पार करना है । साध्वी श्री ने कहा की हम मोहनीय कर्म से बंधे हुए है उसका त्याग करना चाहिए । हम बड़े से बड़े कार्य कर लेते है लेकिन छोटे बड़े दोष पर ध्यान नहीं देते । पर्युषण पर्व में हमे इन दोषों को दूर करते हुए धर्म क्रियाएं करना चाहिए । हमे मैं और अहम का त्याग करना चाहिए । दोपहर में श्री मुनिसुव्रत जिनालय में नवपद जी की पूजन साध्वी देशना निधि एवम अरहम निधि जी की निश्रा में पार्श्व संगीत मंडल द्वारा पढ़ाई गई । लाभार्थी सज्जनलाल कटारिया, रमणलाल कटारिया,चंदूलाल कटारिया परिवार थे ।

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