न डीजे न म्यूजिक सिस्टम का कानफोड़ू संगीत परम्परागत गीत व गरबों ने किया मंत्रमुग्ध

ललित जैन मालवा न्यूज राणापुर
आदिवासी समाज में जो परम्परागत गरबा गाया जाता था वो कहीं ना कहीं विलुप्त होता जा रहा था उसी अनमोल विरासत व संस्कृति को सहेजने का प्रयास विजया दशमी को किया गया। दशहरा मैदान में रावण दहन कार्यक्रम में आए आदिवासी समाज के महिला पुरुषों की टोलियों ने परम्परागत गरबे गाए व खेले।जिसे देखकर युवा मंत्र मुग्ध हो गए।

भारतीय जनता पार्टी जिला अध्यक्ष भानु भूरिया के नेतृत्व में सभी गरबा मंडलियों को पुरस्कृत राशि प्रदान की गई। वर्तमान युवा पीढ़ी गरबा क्या होता है उनको धीरे-धीरे भूलते जा रहे थे ।ऐसे में यह आयोजन युवा पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने में सेतु की भूमिका निभा सकता है।बिना शोर शराबे,बिना डीजे के कानफोड़ू आवाज के सुंदर स्वरों में गूंजते पारंपरिक लोकगीतों की धुन पर एक साथ लयबद्ध उठते कदमों ने यह बता दिया कि संगीत व नृत्य मनुष्य के भीतर से ही आता है।
ये रहे उपस्थित
कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी के जिला उपाध्यक्ष रामेश्वर नायक, मंडल अध्यक्ष कमलेश ,नायक महेश परमार ,दिलीप नलवाया, पार्षद सुरेश वागुल ,विकास राठौड़ ,दीवानसिंह भूरिया, गुलाबसिंह अमलियार ,राजू परमार, रामसिंह भूरिया, राजेश भूरिया , संजय सोलंकी, मांजू भूरिया आदि उपस्थित रहे।
