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ललित जैन राणापुर
पर्युषण पर्व के सातवे दिन श्री मुनिसुव्रत जिनालय में साध्वी श्री अरहमनिधि श्रीजी ने कल्पसूत्र के अंतिम अध्याय का वाचन पूर्ण किया । उन्होंने भगवान के द्वारा जिन शासन स्थापना सहित भगवान के दीक्षा एवम निर्वाण कल्याणक के बारे में विस्तार से बताया । साध्वी श्री ने बताया कि किसी से भी अत्यधिक मोह नही रखना चाहिए । गौतमस्वामी जी को भगवान से मोह था इसलिए उन्हें केवल ज्ञान में बाधा बना । उन्होंने बताया की इसी तरह बाहुबली जी को क्षणिक अहंकार के कारण केवल ज्ञान में अवरोध आया ।इसलिए व्यक्ति को अहम नही करना चाहिए अहंकार से बचना चाहिए । शनिवार को सुबह साध्वी जी महाराज साहब को बारसा सूत्र लाभार्थी समरथमल नाहर परिवार द्वारा वोहराया जाएगा,उसकी अष्टप्रकारी पूजन व आरती होगी । उसके पश्चात बारसा सूत्र का वाचन साध्वी जी के द्वारा किया जाएगा ।
श्री राजेंद्रसुरी गुरुपद पूजन पढ़ाई
शुक्रवार को दोपहर में श्री चारित्र आराधना भवन में दादा गुरुदेव राजेंद्र सूरीजी की अष्ट प्रकारी पूजन लाभार्थी मोतीलाल सालेचा,चंद्रसेन कटारिया,अभय कटारिया,सज्जन लाल कटारिया,रमेशचंद्र सालेचा,मोतीलाल कटारिया परिवार की और से पार्श्व संगीत मंडल ने पढ़ाई । पूजन पकेश्चात लाभार्थी की ओर से स्वामी वात्सल्य का आयोजन भी किया गया । गुरुवार को दादावाड़ी में भगवान के जन्म वाचन का आयोजन संपन्न हुआबी । 14 स्वपनो जी,आरती आदि की बोलिया हुई । केसरिया छापे लगाए गए । श्री संघ का स्वामी वात्सल्य हुआ ।

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