श्री मुनीसुव्रत स्वामी जिनालय में हुआ नवकार भाष्य जाप अनुष्ठान

श्री मुनीसुव्रत स्वामी जिनालय राणापुर में रविवार को नवकार महामंत्र भाष्य जाप अनुष्ठान कार्यक्रम का आयोजन गच्छाधिपति आचार्य नित्यसेन सूरी जी ,आचार्य जयरत्न सूरीजी की आज्ञानुवर्ती वरिष्ठ मुनिराज वीररत्न विजयजी, मुनिराज डा संयम रत्न विज्यजी ,मुनिराज भुवन रत्न विजय जी की पावन निश्रा में कोच्चि से पधारे विधिकारक परेश भाई के द्वारा सम्पन्न करवाया गया । नवकार भाष्य अनुष्ठान में सर्वप्रथम मुनिराज श्री के द्वारा वास् क्षेप किया गया । तत्पश्चात वरिष्ठ मुनिराज श्री वीर रत्न जी ने मंगलाचरण कर जाप प्रारंभ करवाया । नवकार के 108 मनके की पूजन 4 ग्रुप में 13 लाभार्थी परिवार के 4 ,4 जोड़े ने क्रमश की । मुनिराज डॉक्टर संयमरत्न विजय जी ने नवकार महामंत्र की विस्तार से व्याख्या कर नवकार के एक-एक पद के बारे में जानकारी दी। उन्होंने नवकार जाप करने की विधि को सूक्ष्मता से बताया । उन्होंने बताया की जाप 3 प्रकार के होते भाष्य जाप, उपांसु जाप एवम मानस जाप । नवकार जाप की 4 मुद्रा के बारे में जनकारी देकर उससे होने वाले लाभ के बारे में जानकारी दी । विभिन्न मुद्रा में नवकार जाप करने से किन किन बीमारियों से मुक्ति मिलती है उसके बारे में बताया । मुनिराज श्री ने बताया की नवकार जाप के प्रभाव से दूषित परमाणु भाग जाते है । मन शुद्ध होता है । चेहरे पर तेज झलकता है । शरीर एक कवच की तरह हो जाता हैं । जाप करने से कभी क्रोध नही आयेगा । सहन करने की शक्ति शरीर में आती है ।विधिकारक परेश भाई ने भी जाप में संगीत के माध्यम ध्यान में जाप करवाया । नवकार भाष्य जाप के पश्चात नवकार महामंत्र की आरती की गई जिसका लाभ चंद्रसेन कटारिया परिवार ने लिया । विधि कारक परेश भाई का बहुमान मुनिसुव्रत स्वामी जिनालय परिवार ने शाल श्रीफल से किया । राणापुर नगर में पहली बार आयोजित इस कार्यक्रम में सभी ने लाभ लिया । नवकार भाष्य अनुष्ठान के एक दिन पूर्व रात्रि में भक्ति का आयोजन भी किया गया जिसमे विधि कारक परेश भाई ने सुंदर भक्ति गीतों की प्रस्तुति दी । भक्ति पश्चात आरती हुई जिसका लाभ नरेंद्र कुमार नाहर परिवार ने लिया ।
